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June 18, 2021

सचिन तेंदुलकर ने विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल के फॉर्मेट को लेकर कहा कि बेस्ट ऑफ थ्री या एक सीरीज के तौर पर फाइनल होना चाहिए था. मुझे लगता है कि आईसीसी के सामने कुछ चुनौतियां रही होंगी. लेकिन आगे जरूर इसमें बदलाव होगा. उन्होंने न्यूज़18 इंडिया को दिए खास इंटरव्यू में प्लेइंग-11, इंग्लैंड की कंडीशंस के अलावा कई और मसलों पर खुलकर अपनी बात रखी.

भारत और न्यूजीलैंड के बीच गुरुवार से साउथम्पटन में वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप का फाइनल खेला जाएगा. मुकाबला टेस्ट की नंबर-1 और नंबर-2 टीमों के बीच है. इस पर पूरी दुनिया की नजर है. हालांकि, फॉर्मेट को लेकर जरूर सवाल खड़े हो रहे हैं. इसे लेकर न्यूज़18 इंडिया ने पूर्व भारतीय कप्तान और 100 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाने वाले इकलौते बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से बात की. उन्होंने इंग्लैंड के कंडीशंस और टेस्ट चैंपियनशिप के फॉर्मेट पर तफ्सील से अपनी राय जाहिर की.

सवाल: विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल के फॉर्मेट को लेकर काफी बात हो रही है. कई लोग बेस्ट ऑफ थ्री फाइनल की बात कह चुके हैं. आपका क्या मानना है?

सचिन: आईसीसी को विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल के फॉर्मेट को लेकर जरूर काम करना चाहिए. ताकि फाइनल एक मैच का नहीं, बल्कि सीरीज की तरह खेला जाए. जब आप 50 ओवर का विश्व कप या टी20 चैम्पियनशिप खेलते हैं, तो आप किसी भी टीम से एक बार भिड़ते हैं. ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस पूल में हैं. इसमें एक निरंतरता होती है और फिर आप फाइनल खेलते हैं. उस स्थिति में, एक फाइनल मैच होना सही है. लेकिन डब्ल्यूटीसी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया से चार और इंग्लैंड से भी इतने ही मैच खेले और फिर आप अचानक फाइनल में पहुंच जाते हैं. जहां सिर्फ एक मैच ही खेला जाना है. जोकि गलत है.

ये डब्ल्यूटीसी फाइनल सीरीज होनी चाहिए. ऐसे में बेस्ट ऑफ थ्री मैच सही होते. यह तय किया जा सकता है कि आप उन मैच को कैसे खेलते हैं- एक घर में, एक विदेश में या जो भी तय होता. मुझे लगता है कि आईसीसी के सामने भी कई चुनौतियां रही होंगी. समय के साथ वो जरूर इसका समाधान निकाल लेंगे.

सवाल: विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल से पहले इंग्लैंड के मौसम और कंडीशंस पर बहुत चर्चा हो रही है, फाइनल में कंडीशंस का कितना बड़ी भूमिका हो सकती है?

सचिन: कंडीशंस की इंग्लैंड में बड़ी भूमिका होती है. अगर पिच में घास है और आसमान में बादल छाए हुए हैं, तो फिर आपको शुरुआत में संभलकर खेलना होगा. एक बार आंखें जम जाने के बाद अब तेजी से रन बना सकते हैं. साउथम्पटन की पिच पर बल्लेबाजी की जा सकती है. फाइनल में भी कंडीशंस की भूमिका अहम होगी. पिच और बाउंस सिर्फ टीम इंडिया के लिए नहीं, बल्कि न्यूजीलैंड के लिए भी परेशानी हो सकती है.

सवाल: लोग ऐसा मान रहे हैं कि टीम इंडिया विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप में अंडर डॉग है. इस पर आपका क्या कहना है?

सचिन: नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है. टीम इंडिया ने काफी अच्छी क्रिकेट खेली है. अगर आप पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे की ही बात करें तो करीब आठ-दस खिलाड़ी टीम से बाहर थे. उस समय बेंच पर बैठे खिलाड़ियों को मौका दिया गया. इसमें से कुछ तो सिर्फ नेट बॉलर की तरह टीम के साथ आए थे. लेकिन उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन किया. इससे पता चलता है कि टीम इंडिया के पास कितना टैलेंट है. इसलिए हम अंडरडॉग नहीं है. लेकिन ये बात सही है कि हमें मैच खेलने का मौका नहीं मिला है. न्यूजीलैंड के साथ अच्छी बात है कि उसने फाइनल से पहले इंग्लैंड के खिलाफ दो टेस्ट खेले हैं. वहीं, भारतीय टीम को मैच खेलने का मौका नहीं मिला है.

सवाल: टीम इंडिया का मौजूदा गेंदबाजी आक्रमण अब तक का सबसे बेहतर माना जा रहा है. क्या आपको लगता है कि विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में यही सबसे बड़ी ताकत होगी?

सचिन: मुझे तुलना पसंद नहीं है. मौजूदा गेंदबाजी आक्रमण में काफी विविधता है. मोहम्मद शमी तेजी से गेंदबाजी करते हैं. बुमराह का एक्शन एकदम अलग है. इशांत ऊंचे कद के गेंदबाज हैं. उमेश और सिराज भी हैं. सभी एक दूसरे से अलग हैं. एक पैकेज के रूप में ये सभी कमाल के गेंदबाज हैं.

कोरोना का साइड इफेक्ट धार्मिक यात्राओं पर पड़ने से अनेक वे श्रद्धालु त्रस्त है जो लंबे समय से मंदिरों के पट बंद के चलते पूजा-अर्चना से विमुख हो रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के सिद्ध शक्तिपीठ से बिना दर्शन लौट रहे दिल्ली के श्रद्धालुओं ने बताया कि नगर कोर्ट कांगड़ा देवी मां ब्रजेश्वरी देवी, मां चिंतपूर्णी, मां ज्वाला, मां चामुंडा देवी, मां नैना देवी मंदिरों के पट बंद है।

मंदिरों के बाहरी द्वार पर ही दंडवत प्रणाम करके साधक लौट रहे हैं। कोरोना के कारण दिल्ली व अन्य प्रांतों से हर माह आने वाले पर्यटको व हजारों मां के श्रद्धालुओं की लगातार कमी के चलते सभी वर्गों के कारोबार व धंधे पर भी असर पड़ रहा है।

दिल्ली से हजारों साधक मन्नत मांग कर शक्तिपीठों पर नियमित जाते थे उनका क्रम टूट रहा है। मां ब्रजेश्वरी देवी का कांगड़ा में चमत्कारिक मंदिर है। हिमाचल के कांगड़ा जिले में ही मां ज्वाला भगवती के मंदिर के साथ चमत्कारिक गोरख टिब्बा है। यहां विलुप्त ज्वालाओं का अनोखा दृश्य देखने को मिलता है।

मुगल काल के बादशाह अकबर ने अपने बेटे की सलामती के लिए इस मंदिर में छतर चढ़ाया था। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में चिंताओं से मुक्ति देने वाली मां चिंतपूर्णी देवी की सिद्ध पीठ है। कहा जाता है कि यहां मां सती के चरणों के अंश गिरे थे। हिमाचल प्रदेश की देव भूमि पर ही मां चामुंडा देवी का मंदिर है। चंड-मुंड राक्षस की नाशक मां महाकाली का दिव्य स्थान है।

इसी गणित में शिवालिक पर्वत पर मां नैना देवी का मंदिर है। कहा जाता है कि यहां मां पार्वती सती के दोनों नेत्र गिरे थे। उनकी पूजा यहां पिंडी के रूप में की जाती है। ऐतिहासिक मंदिर में सिख गुरु गोविंद सिंह ने हवन करा के आतताई तत्वों के नाश की कामना की थी। हिमाचल की इन शक्तिपीठों में केवल पुजारी उपासना कर रहे हैं। जबकि श्रद्धालुओं के मंदिर प्रवेश पर रोक है। बाजार खुले हैं।

International Boxing Association (AIBA) set a prize fund of $320,000 USD for the medalists of the EUBC U22 European Boxing Championships, the first bouts of which started on Thursday. The finals, both men’s and women’s, are scheduled for June 24. 

The winners will receive $8,000 USD. For silver medalists, AIBA provides a prize of $4,000 USD, for both bronze medalists – $2,000 each. The awards are equal for both genders in all 10 weight classes.  

“We are taking care of our athletes’ well-being, therefore, it is crucial that we provide prize money for the medalists,” AIBA President Umar Kremlev said in a statement. 

“Boxers’ achievements should be recognized and valued. Personally for me, as a President, it is important to give opportunities to our athletes. Their hard work and dedication are outstanding and very respectable. I want to encourage them for further progress,” he added.