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शक्तिपीठों से बिना दर्शन लौट रहे हैं दिल्ली वासी: कोरोना के चलते पट है बंद

कोरोना का साइड इफेक्ट धार्मिक यात्राओं पर पड़ने से अनेक वे श्रद्धालु त्रस्त है जो लंबे समय से मंदिरों के पट बंद के चलते पूजा-अर्चना से विमुख हो रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के सिद्ध शक्तिपीठ से बिना दर्शन लौट रहे दिल्ली के श्रद्धालुओं ने बताया कि नगर कोर्ट कांगड़ा देवी मां ब्रजेश्वरी देवी, मां चिंतपूर्णी, मां ज्वाला, मां चामुंडा देवी, मां नैना देवी मंदिरों के पट बंद है।

मंदिरों के बाहरी द्वार पर ही दंडवत प्रणाम करके साधक लौट रहे हैं। कोरोना के कारण दिल्ली व अन्य प्रांतों से हर माह आने वाले पर्यटको व हजारों मां के श्रद्धालुओं की लगातार कमी के चलते सभी वर्गों के कारोबार व धंधे पर भी असर पड़ रहा है।

दिल्ली से हजारों साधक मन्नत मांग कर शक्तिपीठों पर नियमित जाते थे उनका क्रम टूट रहा है। मां ब्रजेश्वरी देवी का कांगड़ा में चमत्कारिक मंदिर है। हिमाचल के कांगड़ा जिले में ही मां ज्वाला भगवती के मंदिर के साथ चमत्कारिक गोरख टिब्बा है। यहां विलुप्त ज्वालाओं का अनोखा दृश्य देखने को मिलता है।

मुगल काल के बादशाह अकबर ने अपने बेटे की सलामती के लिए इस मंदिर में छतर चढ़ाया था। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में चिंताओं से मुक्ति देने वाली मां चिंतपूर्णी देवी की सिद्ध पीठ है। कहा जाता है कि यहां मां सती के चरणों के अंश गिरे थे। हिमाचल प्रदेश की देव भूमि पर ही मां चामुंडा देवी का मंदिर है। चंड-मुंड राक्षस की नाशक मां महाकाली का दिव्य स्थान है।

इसी गणित में शिवालिक पर्वत पर मां नैना देवी का मंदिर है। कहा जाता है कि यहां मां पार्वती सती के दोनों नेत्र गिरे थे। उनकी पूजा यहां पिंडी के रूप में की जाती है। ऐतिहासिक मंदिर में सिख गुरु गोविंद सिंह ने हवन करा के आतताई तत्वों के नाश की कामना की थी। हिमाचल की इन शक्तिपीठों में केवल पुजारी उपासना कर रहे हैं। जबकि श्रद्धालुओं के मंदिर प्रवेश पर रोक है। बाजार खुले हैं।

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